मेरे हर सलामी पे , खुदा ना बन ऐ खुदगर्ज़ ,
मुझ में भी ख़ुदी है ये खुदगर्ज़ी ,
दे जाता हूँ , ज़िंदा होने का सबूत ,
बस छोटे से सलाम में।
भूल जाता हूँ , हर भूल को ,
ढूंढता हूँ खुद की इमारत ,
भूले - बिसरे आया हूँ यहाँ ,
आइना खुद का, याद दिलाने को।
हमारा दर्द भी कुछ काम ना था
हम हुए हल्के तेरे हलक के आगे ,
जब था दर्दे हिस्सेदार का हिस्सा
हमसे ज़रा था ,भारी।


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